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Jinism Quotes

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"आओ जैन धर्म को जाने।  www.jagatgururampalji.org श्री महावीर जैन के द्वारा चलाये गए 363,पाखंड मतों के अनुसार भक्ति करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव है या नही? "जैन धर्म का खुलासा। राजा नाभिराज के पुत्र श्री ऋषभ देव हुए जो पवित्र जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर कहलाते है उन्होने 84 लाख योनियों का कष्ट भोगा।जब उनका मोक्ष नही हुआ तो अन्य जैन धर्म के साधको का कैसे संभव है। "महावीर जैन का इतिहास। स्वर्ग मे देवता बनने के बाद श्री महावीर जैन को क्यो मिली गधे की योनि?  इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिये अवश्य पढ़ीये पुस्तक :-आओ जैन धर्म को जाने।।

Buddha's Quotes

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"महात्मा बुद्ध को यथार्थ ज्ञान नही था। www.jagatgururampalji.org "महात्मा बुद्ध के मार्ग पर चलते चलते चीन रूस जैसे देश नास्तिक बन गए। उनके अनुयायी भी ये नहीं जानते कि भगवान कौन है?और पूर्ण मोक्ष कैसे मिलेगा। जबकि वेद प्रमाणित करते हैं कबीर परमात्मा ही पूर्ण मोक्ष दायक है।  "परमात्मा की प्राप्ति तथा मोक्ष (निर्वाण) पूर्ण गुरु की शरण में जाने से ही संभव है। यदि गौतम बुद्ध के पास मोक्ष मार्ग नहीं था, तो फिर क्यों लोगो को गलत साधना बता कर उनका वह स्वयं का जीवन बर्बाद किया। "महात्मा बुद्ध ने शास्त्र विरुद्ध साधना,हठयोग, तप,तथा व्रत,किया। शास्त्र विधि को त्याग कर मनमाना आचरण करने के कारण वह पूर्ण मोक्ष से वंचित रहे। अधिक जानकारी के लिए देखिये साधना चैनल 7:30pm.

Sikh Relegion

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सतगुरू सेवा का महत्व। www.jagatgururampalji.org श्री नानक देव जी ने गुरुग्रंथ साहिब पृृृृष्ठ 1342,पर कहा है:- "गुरु सेवा बिन भक्ति ना होई। अनेक जतन करै जै कोई।। कैसे गुरु की सेवा करनी चाहिये, वह पूर्ण गुरु हो और पूर्ण गुरु कौन है? "पूर्ण गुरु के बिना मुक्ति संभव नही है। श्री गुरुग्रंथ साहिब पृृृृृृष्ठ 946,:- "बिन सतगुरु भेटे मुक्ति ना होई। बिन सतगुरु भेटे नाम (मंत्र)पाया न जाई।। सतगुरु की शरण बिना नाम (मंत्र) मिल नही सकता।और नाम (मंत्र) मिले बिना मुक्ति नही हो सकती। वर्तमान मे पूर्ण गुरु सतगुरु संत रामपाल जी महाराज है,उनसे वास्तविक सत्यनाम मंत्र प्राप्त कर अपना मनुष्य जीवन सफल बनावें।अधिक जानकारी के लिए देखिये साधना चैनल 7:30pm.

Bible in hindi

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Bible in hindi www.jagatgururampalji.org पवित्र बाइबिल (उत्पत्ति ग्रंथ) में लिखा हुआ है कि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने जैसा उत्पन्न किया इससे सिद्ध होता है कि परमेश्वर मनुष्य सह दृश्य हैं और छ: दिन में सृष्टि की रचना की और सातवें दिन तखत पर जा बिराजा। "पवित्र ईसाई धर्म का परिचय- (उत्पत्ति ग्रंथ 1:27) तब परमेंश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरुप जैसा उत्पन किया,भगवान ने मनुष्य को अपने प्रति रूप बनाया,इससे स्वसिद्ध है की भगवान मनुष्य जैसा है। (उत्पत्ति ग्रंथ1:28) में परमेश्वर ने यह आशीष दी है कि फलो फुलो और पृथ्वी भर दो और उसे अपने अधिकार मे करलो,पृथ्वी पर रेंगने वाले जीव आकाश मे उडने वाले पक्षी और जलसर वाले जीव इन सब पर तुम्हारा अधिकार हो,मांस खांने का परमात्मा का आदेश नही है। काल प्रभु ने आदम और हव्वा को जीवन के वक्ष का फल खाने की सजा वाटिका से निकाल दिया,और कहा कि अब तुम्हें अपना पेट भरने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ेगा,और औरत को श्राप दिया कि तो हमेशा आदमी के प्राधीन रहेगी। देखें साधना चैनल 7:30pm.

Quran Sharif

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कुरान सरीफ का ज्ञान। www.jagatgururampalji.org कबीर साहेब ही अल्लाह है। -फजाईले आमाल। वह कबीर अल्लाह तमाम पोशीदा और जाहिर चीजों का जानने वाला है (सबसे)बड़ा है और आलिशान रूत्बे वाला है। "नबी मोहम्द जी ने कभी मांस नही खाया और न उनके एक लाख अस्सी हजार अनुयाईयो ने खाया था। "रोजा,बंग,निवाज, करते थे।गाय आदी बिस्मिल नही करते थे। "नबी मोहम्द नमस्कार है,राम रसूल कहाया।एक लाख अस्सी कूं सौंगंध जिन नही करद चलायां।। अधिक जानकारी के लिए देखिये साधना चैनल 7:30pm.

Gita Shar

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Srimadbhagwatgita www.jagatgururampalji.org "गीता ज्ञान काल ने बोला। श्री कृृृृृृष्ण जी विष्णु जी के अवतार थे,जिनकी चार भुजाऐं है।जबकि गीता ज्ञान बोलने वाले प्रभु की एक हजार भुजाऐं है।जो स्वयं कहता है-अर्जुन मैं बडा हुआ काल हुँ। "श्री कृृृृष्ण जी काल नही थे। काल कोई और शक्ति है।वह श्री कृृृृष्ण जी के शरीर मे प्रेतवत प्रवेश करके गीता जी के ज्ञान रूप मे चारों पवित्र वेदों का चार बोल गया। "पवित्र गीता जी का ज्ञान किसने कहा? श्री कृृृृृृृष्ण जी तो पहले से ही श्री अर्जुन जी के साथ थे।यदि पवित्र गीता जी के ज्ञान को गीता जी अध्याय 11, श्लोक 32,मे यह नही कहते की अब प्रवृृृृत हुआ हुँ। अधिक जानकारी के लिए देखिये सत्संग साधना चैनल पर 7:30pm.

Kabir Prakat Diwas

#KabirPrakatDiwasNotJayanti www.jagatgururampalji.org People celebrate the birth aniversary of gods,who are themselves in the cycle of life and death but lordkabir descends from satlok,along with his body and appears on earth,that's why the celebration is called Prakat Diwas. 1DayLeft_KabirPrakatDiwas ht